श्री सुरेश चंद्र नारमदेव आत्मज स्व. श्री बाबूराव नारमदेव
गौत्र भारद्वाज
1925 - 2015
आप (मेरे पिताजी ) एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व थे। शिक्षाविद थे कवि ह्र्दय थे और शरीर सौष्ठव पर भी अभ्यास रत रहते थे । गायत्री जप तप को लेकर उनकी गजब की निष्ठा और विश्वास था, जीवन पर्यंत गायत्री मंत्र साधना करते रहे ।
पूरे परिवार को साथ लेकर चलना आपकी प्रगाढ़ इच्छा रही।
शिक्षक और शाला निरीक्षक के रूप में आपने महेश्वर, बड़वाह, भीकनगांव, महू, कसरावद इत्यादि स्थानों पर सेवाएं दी। जहाँ भी रहे रा स्व से संघ के सैनिकों की तरह रहे , अपनी संघ निष्ठा के पालन में कभी समझौता नहीं किया। जिसके कारण कई कांग्रेसी नेताओं से अनबन व विवाद होते थे ।
धार में स्थित आनंद हिन्दू अनाथ आश्रम को यथा सम्भव सहयोग करते रहे। जो कि आज भी रा स्व से संघ द्वारा संचालित एक उत्तम सेवा प्रकल्प है।
महेश्वर में जब रहे तब उनके अनेक सन्यासियों, तपस्वियों ज्ञानियों से गहरे सम्बन्ध थे यथा संभव उनकी सेवा सहायता करते थे।
जीवन की संध्या के अंतिम दशक उन्होंने गायत्री साधना में और गोशालाओं को सहयोग देने में लगाया।
जन्म महाशिवरात्रि 1925
मोक्ष अनन्त चतुर्दशी 2015
नारमदेव परिवार के अनन्त श्रद्धासुमन के साथ प्रणाम।
(रवि नारमदेव)
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suresh chandra naramdeo
Swargiya Kakaji ke Charano mein Koti koti Pranaam 🙏🙏🙏
ReplyDeleteश्रद्धेय आदरणीय को सादर प्रणाम करते विनम्र श्रद्धांजलि
ReplyDelete🙏🙏🙏